प्रशासन ने 18 नवंबर को खरीद शुरू करने का दिया था वादा, अब 27 तक टली तुलाई
महिया बोले- “सरकार की प्राथमिकता किसान नहीं, ठेकेदार और निजी हित”
NEXT 23 नवम्बर, 2025 श्रीडूंगरगढ़। जिला प्रशासन की देरी और बार-बार तारीख बदलने से बीकानेर जिले के किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। अखिल भारतीय किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल से 14 नवंबर को हुई बैठक में प्रशासन ने 18 नवंबर से सरकारी खरीद शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसे फिर आगे बढ़ा दिया गया।
अब राजफेड और प्रशासन की ओर से नई तारीख बुधवार, 27 नवंबर बताई जा रही है। लगातार तारीख बदलने और असमंजस के चलते किसान अपनी फसल औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं।
5 लाख बोरी कम दाम में बिकी, जिले को ₹236 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया ने बताया कि बीकानेर जिले में करीब 5 लाख बोरी फसल बिना सरकारी खरीद के कम भाव में बिक चुकी है।
केवल श्रीडूंगरगढ़ के किसानों को ₹47.25 करोड़ और पूरे जिले में यह नुकसान बढ़कर ₹236.25 करोड़ तक पहुँच गया है।
महिया के अनुसार, अगर सरकार और प्रशासन समय पर खरीद शुरू करते, तो किसानों को यह बड़ा आर्थिक नुकसान नहीं झेलना पड़ता।
ठेकेदार पर सवाल, प्रक्रिया समय पर क्यों नहीं हुई पूरी?
महिया ने आरोप लगाया कि
“यह देरी सिर्फ तकनीकी कारण नहीं, बल्कि निजी स्वार्थ और ठेकेदारों के तालमेल का मामला लगती है। अगर ठेकेदार गलत था तो उसे समय रहते बदला क्यों नहीं गया?”
उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधि ठेकेदार को गलत बताकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह पूरी स्थिति साफ करती है कि किसानों का हित सरकार की प्राथमिकता सूची में नहीं है।
सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल
महिया ने कहा कि
“एक तरफ सरकार डबल इंजन और किसानों की आय दोगुनी होने का दावा करती है, और दूसरी तरफ सिर्फ नौ दिनों में किसानों को अरबों का नुकसान हो गया। क्या यही संवेदनशीलता है? क्या यही प्रतिबद्धता है किसानों के प्रति?”
किसानों में निराशा और आक्रोश
खरीद में देरी से मंडियों में समर्थन मूल्य और बाज़ार दरों में भारी अंतर पैदा हो गया है। किसानों का कहना है कि अगर तुरंत व्यवस्था नहीं हुई, तो आंदोलन की राह अख्तियार करनी पड़ेगी।




















