घास मंडी स्थित दुकान का मामला सिविल कोर्ट से हाईकोर्ट तक पहुंचा, दोनों अदालतों में मालिक के पक्ष में फैसला; बकाया मीन्स प्रॉफिट की वसूली के लिए 17 नवंबर को होगी सुनवाई
NEXT 6 नवम्बर, 2026 श्रीडूंगरगढ़। कस्बे के मुख्य बाजार घास मंडी स्थित दुकान के मालिकाना हक और कब्जे को लेकर वर्षों से चल रहा विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। न्यायालय के आदेश के बाद किरायेदार को दुकान खाली कर उसका कब्जा दुकान मालिक को सौंपना पड़ा। लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे दुकान मालिक चैनरूप डागा को कब्जा मिलने से राहत मिली है। हालांकि, बकाया मीन्स प्रॉफिट की वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई अभी जारी है।

एडवोकेट दीपिका करनाणी ने बताया कि घास मंडी स्थित दुकान चैनरूप डागा के मालिकाना हक की है। इस दुकान पर कई वर्षों से विजयकुमार बोथरा पुत्र कन्हैयालाल बोथरा किरायेदार के रूप में व्यवसाय कर रहे थे। दुकान मालिक ने किरायेदार विजयकुमार बोथरा को दुकान खाली करने और बकाया किराया चुकाने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता मोहनलाल सोनी के माध्यम से कानूनी नोटिस भिजवाया था। नोटिस के बावजूद दुकान खाली नहीं की गई तो दुकान मालिक की ओर से न्यायालय में दुकान खाली करवाने, कब्जा दिलाने और बकाया किराया प्राप्त करने के लिए वाद दायर किया गया।
न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद चैनरूप डागा के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विजयकुमार बोथरा के विरुद्ध दुकान खाली करने की डिक्री पारित की। सुनवाई के दौरान किरायेदार ने दुकान पर स्वयं का मालिकाना हक भी जताया, लेकिन न्यायालय ने उसके दावे को झूठा करार देते हुए स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत, अब इजराय से खाली हुई दुकान
सिविल न्यायालय के फैसले के विरुद्ध किरायेदार विजयकुमार बोथरा ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को यथावत रखते हुए दुकान खाली करने और दुकान मालिक को मीन्स प्रॉफिट देने के आदेश दिए। इसके बावजूद किरायेदार ने न तो दुकान खाली की और न ही निर्धारित मीन्स प्रॉफिट की राशि चुकाई। इस पर दुकान मालिक की ओर से न्यायालय में इजराय की कार्रवाई शुरू की गई। आखिरकार न्यायालय के आदेश की पालना में किरायेदार को दुकान खाली कर उसका कब्जा चैनरूप डागा को सौंपना पड़ा।
एडवोकेट हेमराज सोनी ने बताया कि दुकान का कब्जा मिलने के बाद अब बकाया मीन्स प्रॉफिट की राशि वसूलने के लिए विजयकुमार बोथरा के विरुद्ध इजराय की कार्रवाई जारी है। मामले में अगली तारीख 17 नवंबर निर्धारित है। इस दिन बकाया राशि की वसूली के लिए कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।






































