LL.B. के कई पेपर पंचायत चुनाव की तारीखों से टकराए, 250 से 500 किमी दूर से आने वाले विद्यार्थियों के सामने असमंजस; परीक्षा तिथियों में बदलाव की मांग
NEXT 8 अक्टूबर, 2026 श्रीडूंगरगढ़। पंचायत राज चुनाव और LL.B. 2nd एवं 4th Semester की परीक्षाओं की तिथियां आमने-सामने आने से विधि विद्यार्थियों के सामने ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जिसमें उन्हें परीक्षा और लोकतांत्रिक अधिकार में से किसी एक को चुनने की मजबूरी हो सकती है। विद्यार्थियों ने इसे केवल परीक्षा कार्यक्रम की समस्या नहीं, बल्कि मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए टकराव वाली परीक्षा तिथियों में बदलाव की मांग की है।

राजकीय विधि स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बीकानेर के विद्यार्थियों ने इस संबंध में डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर के रजिस्ट्रार के नाम प्राचार्य प्रो. भगवानाराम बिश्नोई को ज्ञापन सौंपा है। विद्यार्थियों का कहना है कि पंचायत राज चुनाव की प्रक्रिया में अनेक छात्र प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। कई विद्यार्थी स्वयं चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने गांव एवं क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कार्यों में भाग लेते हैं।
एक ही दिन मतदान और पेपर… व्यावहारिक रूप से दोनों संभव नहीं
समस्या का सबसे बड़ा पहलू यह है कि कई मामलों में मतदान और परीक्षा एक ही दिन निर्धारित हैं। उदाहरण के लिए 22 अक्टूबर को जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान है और उसी दिन Public International Law की परीक्षा है। 24 अक्टूबर को सरपंच पद के लिए मतदान तथा Constitutional Law-II की परीक्षा है। इसी तरह 3 नवंबर को जिला परिषद/पंचायत समिति मतदान और Labour & Industrial Laws-I, जबकि 5 नवंबर को सरपंच मतदान और Bhartiya Nyay Sanhita, 2023 की परीक्षा निर्धारित है।
LL.B. 4th Semester में भी 28 अक्टूबर को जिला परिषद/पंचायत समिति सदस्यों के मतदान के दिन Bhartiya Sakshya Adhiniyam, 2023 की परीक्षा है। 30 अक्टूबर को सरपंच पद के मतदान के दिन Criminology, Penology & Victimology, Law & Forensic Science, Cyber Crimes & Cyber Security तथा Criminal Psychology जैसे विषयों के पेपर निर्धारित हैं।
250-500 किमी दूर के विद्यार्थी कैसे निभाएंगे दोनों जिम्मेदारियां?
विद्यार्थियों की परेशानी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि महाविद्यालय में राजस्थान के अलग-अलग जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से विद्यार्थी अध्ययन करते हैं। कई विद्यार्थी 250-300 किलोमीटर, जबकि कुछ करीब 500 किलोमीटर तक की दूरी से परीक्षा देने आते हैं।
ऐसे में यदि विद्यार्थी बीकानेर में परीक्षा देता है तो उसी दिन अपने गांव या गृह क्षेत्र के मतदान केंद्र तक पहुंचना कई मामलों में संभव नहीं होगा। वहीं मतदान करने के लिए गृह क्षेत्र जाने पर परीक्षा छूटने का खतरा रहेगा। खासकर चुनाव लड़ रहे या चुनावी प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से जुड़े विद्यार्थियों के लिए यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
मुद्दा परीक्षा से छूट का नहीं, दोनों अधिकार बचाने का
विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांग परीक्षा से बचने या परीक्षा टालने की नहीं है। वे विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था का सम्मान करते हैं, लेकिन चाहते हैं कि जहां चुनाव और परीक्षा की तारीखें सीधे टकरा रही हैं, वहां परीक्षा कार्यक्रम में आवश्यक समायोजन किया जाए।
विद्यार्थियों का तर्क है कि पंचायती राज चुनाव लोकतंत्र की सबसे निचली और महत्वपूर्ण इकाई हैं। ऐसे में शिक्षित युवाओं की चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। दूसरी ओर विधि के विद्यार्थी होने के नाते उनके लिए संविधान, कानून और लोकतांत्रिक व्यवस्था का अध्ययन जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करना भी है।
कुछ पेपर आगे-पीछे करने से दोनों रास्ते खुले रहेंगे
विद्यार्थियों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन टकराव वाली कुछ परीक्षा तिथियों को आगे-पीछे कर दे तो विद्यार्थियों को परीक्षा और मतदान में से किसी एक को चुनने की स्थिति से बचाया जा सकता है। इससे विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था भी प्रभावित नहीं होगी और विद्यार्थी अपने लोकतांत्रिक अधिकार का भी निर्वहन कर सकेंगे।
विद्यार्थियों ने महाविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया है कि उनकी मांग को विश्वविद्यालय के सक्षम अधिकारियों के समक्ष गंभीरता से रखा जाए और टकराव वाली परीक्षा तिथियों में मानवीय एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए आवश्यक संशोधन किया जाए।
ज्ञापन देने के दौरान रमेश सिद्ध, चेतराम धतरवाल, गणेश गौरछिया, दिनेश बेनीवाल, मदन मेघवाल, हर्षित सोनी, हनुमान आदि ने कहा कि चुनाव और परीक्षा दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, इसलिए समाधान ऐसा होना चाहिए जिसमें किसी विद्यार्थी को अपने लोकतांत्रिक अधिकार और शैक्षणिक भविष्य में से किसी एक का चुनाव न करना पड़े।



















