NEXT 19 जुलाई, 2026 श्रीडूंगरगढ़। किसी अपने की अंतिम विदाई के बीच एक परिवार ने ऐसा निर्णय लिया, जो दो दृष्टिहीन लोगों के जीवन में नई रोशनी लेकर आएगा। स्वर्गीय तारादेवी जैन (धर्मपत्नी मांगीलाल जैन खटेड़) के निधन के बाद उनके परिजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए मरणोपरांत नेत्रदान कराया। शनिवार देर रात संपन्न हुआ यह नेत्रदान क्षेत्र में मानव सेवा और सामाजिक जागरूकता का प्रेरक उदाहरण बन गया।
तेरापंथ युवक परिषद श्रीडूंगरगढ़ के अध्यक्ष विक्रम मालू, समाजसेवी हनुमान दुगड़ की प्रेरणा तथा नेत्रदान प्रभारी अशोक झाबक की तत्परता से पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी हुई। प्राणनाथ हॉस्पिटल, सरदारशहर की टीम के भंवरलाल प्रजापत एवं दिनेश शर्मा ने नेत्रों का संग्रह किया।
परिवारजनों ने शोक की घड़ी में भी सेवा और परोपकार को प्राथमिकता देते हुए बिना किसी विलंब के नेत्रदान की सहमति दी। इस निर्णय में पुत्र विद्युत जैन, पुत्रवधू विजयश्री जैन, रिश्तेदार प्रकाश मालू सहित पूरे परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सामाजिक सरोकार से जुड़े लोगों ने परिवार के इस निर्णय की मुक्तकंठ से सराहना की।
नेत्रदान के दौरान राजकुमार झाबक, नवरंग स्वामी, बनवारीलाल मारू, कन्हैयालाल स्वामी, प्रकाश नाई, दक्ष मालू, रसना जैन सहित अनेक समाजजन एवं परिजन मौजूद रहे। सभी ने इसे मानवता की सच्ची सेवा बताते हुए नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया।
तेरापंथ युवक परिषद ने आमजन से मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के जाने के बाद भी उसकी आंखें दो जरूरतमंदों के जीवन में उजाला भर सकती हैं। यही नेत्रदान की सबसे बड़ी सार्थकता है।




















