अपर लोक अभियोजक ने किया जमानत का विरोध, अदालत ने माना गंभीर मामला; फर्जी मुख्त्यारनामे से तीन विक्रय पत्र पंजीकृत कराने का आरोप
NEXT 9 अक्टूबर, 2026 श्रीडूंगरगढ़। करीब 30 साल पहले मृत्यु हो चुकी महिला की कृषि भूमि को कथित तौर पर फर्जी मुख्त्यारनामे के जरिए बेचने के मामले में अपर सेशन न्यायालय, श्रीडूंगरगढ़ ने आरोपी अनवर अली की जमानत याचिका खारिज कर दी। अपर सेशन न्यायाधीश कृष्ण कान्त ने 7 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में मामले की गंभीरता और केस डायरी में उपलब्ध साक्ष्यों को जमानत नहीं देने का आधार माना।
अपर लोक अभियोजक ने जमानत का किया पुरजोर विरोध
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी को श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में रहने के कारण परिवादिया की माता की मृत्यु की जानकारी होने के बावजूद अन्य लोगों के साथ षड्यंत्र रचकर उनके नाम से कथित फर्जी मुख्त्यारनामा तैयार कराने और कृषि भूमि बेचने की प्रक्रिया में भूमिका निभाने का आरोप है। अभियोजन पक्ष ने इसे गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि इस कृत्य से परिवादिया को मिलने वाली कृषि भूमि हड़पने का प्रयास किया गया। अपर लोक अभियोजक ने जमानत देने पर कानून व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताते हुए याचिका खारिज करने का आग्रह किया।
1995 में हुई थी महिला की मृत्यु, 2025 में जमीन की रजिस्ट्री
परिवादिया संजू की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी माता लक्ष्मी देवी पत्नी नेमीचन्द की 21 जुलाई 1995 को नेपाल के विराटनगर में मृत्यु हो गई थी। मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हुआ था। परिवार के सदस्य अलग-अलग स्थानों पर रहते थे, जिसके चलते माता की मृत्यु के बाद कृषि भूमि का नामांतरण उनके पक्ष में नहीं हो पाया।
परिवादिया ने 2 अक्टूबर 2025 को ग्राम जेतासर स्थित अपनी माता की कृषि भूमि की ऑनलाइन जमाबंदी निकलवाई तो पता चला कि खसरा नंबर 474 में मुकेश स्वामी, अंकित धामा और मनोज कुमार प्रजापत के नाम अलग-अलग हिस्सों में खातेदार दर्ज हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 24 सितंबर 2025 को तीन अलग-अलग विक्रय पत्र पंजीकृत कराए गए थे।
जांच में षड्यंत्र और कूटरचित दस्तावेजों की भूमिका सामने आने का उल्लेख
परिवादिया ने आरोप लगाया कि अनवर अली सहित अन्य लोगों ने षड्यंत्रपूर्वक एक महिला को लक्ष्मी देवी बताकर उनके नाम से कथित कूटरचित मुख्त्यारनामा तैयार कराया और उसके आधार पर कृषि भूमि का विक्रय करवा दिया। पुलिस थाना श्रीडूंगरगढ़ में मामले की जांच की गई। तथ्यात्मक रिपोर्ट में आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में अपराध प्रमाणित होने की बात कही गई।
बचाव पक्ष ने भी रखे तर्क
आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि आरोपी को भू-स्वामी से एक लाख रुपए दलाली मिलना तय हुआ था और उसके निर्देश पर पंजीयन करवाया गया। बचाव पक्ष ने षड्यंत्र और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के आरोपों से इनकार किया। साथ ही बताया कि अनुसंधान पूरा हो चुका है, आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया जा चुका है और मामले के निस्तारण में समय लग सकता है। इन आधारों पर जमानत देने की मांग की गई।
अदालत ने साक्ष्यों और अपराध की गंभीरता को माना अहम
अदालत ने आदेश में उल्लेख किया कि लक्ष्मी देवी की मृत्यु 21 जुलाई 1995 को हो चुकी थी, ऐसे में 24 सितंबर 2025 को उनके नाम से मुख्त्यारनामा तैयार होना प्रथम दृष्टया संदिग्ध है। केस डायरी में उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों और मामले में आरोपी की कथित भूमिका को देखते हुए अदालत ने जमानत का लाभ देना उचित नहीं माना। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि इसी मामले के अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी पूर्व में खारिज की जा चुकी हैं।
अपर सेशन न्यायाधीश कृष्ण कान्त ने निष्कर्षतः अनवर अली पुत्र हजारीखां की प्रस्तुत जमानत याचिका खारिज कर दी।



















