मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में धान्य-फल अभिषेक, 300 वाहनों का जत्था सुरसुरा धाम के लिए रवाना
NEXT 8 मई, 2026 श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ स्थित महर्षि दयानंद छात्रावास एवं वीर तेजा मेमोरियल ट्रस्ट में चल रहे मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं तेजा कथा के दौरान शुक्रवार को श्रद्धा और उत्साह का माहौल देखने को मिला। व्यास गद्दी पर विराजमान विमला बाईसा जाखड़ (जोधपुर) ने वीर तेजाजी महाराज के जन्मोत्सव का वृतांत सुनाया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे तथा महिलाओं ने नृत्य कर उत्साह व्यक्त किया। कथा के साथ लगातार सजीव झांकियां भी प्रस्तुत की गईं।

कार्यक्रम में पंडित कैलाश सारस्वत ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना करवाई। मुख्य यजमान गोपाल सायच ने सपत्नीक मूर्ति का धान्य एवं फल अभिषेक किया। दोपहर बाद ट्रस्ट अध्यक्ष मंगला राम गोदारा ने तेजाजी की ध्वजा फहराकर सुरसुरा धाम से ज्योत लाने के लिए 300 वाहनों के जुलूस को रवाना किया। जत्था शाम 4 बजे नोसरिया में किशनाराम सारण के यहां जलपान के बाद सुरसुरा के लिए प्रस्थान हुआ।
इस दौरान जाट महासभा अध्यक्ष भोमराज गाट, पूर्व प्रधान मनोहर सियाग तथा समाजसेवी भागीरथ जाखड़ सहित कई अतिथि कार्यक्रम में पहुंचे। ट्रस्ट की ओर से मंगला राम गोदारा ने सभी अतिथियों का सम्मान किया।
कार्यक्रम में पूर्व जिला प्रमुख मेघाराम महिया, केसराराम गोदारा, मूलाराम थोरी, श्रवण जाखड़, चांदराम चाहर, श्याम आर्य, हेतराम जाखड़, हरिप्रसाद भादू, हरिराम बाना, ओम बाना, प्रभुराम गोदारा, राजेश मंडा, दुर्गाराम महिया, भंवर बाना, मूलाराम साहू, सहीराम शायच, शंकर जाखड़, सत्यनारायण बेरड़, रामेश्वर गोदारा, रेवत दुसाद, कुम्भाराम जाखड़, सरजीत जाखड़, श्रीराम जाखड़, भंवरलाल जाखड़, श्रवण चाहर, चंदू कड़वासरा, गोपाल तरड़, मनफूल गोदारा, संपत दुसाद, गणेश पोटलिया, तोलाराम सियाग, जगदीश गोदारा, पेमाराम गोदारा, प्यारेलाल ढूकिया, श्रवण भांबू, सुशील शेरड़िया, देवीलाल बाना, सीताराम सीवर, हरलाल बाना, तुलछाराम बाना, मोडाराम महिया, राकेश जाखड़, रामचंद्र गिल्ला, मामराज समंदसर, धन्नाराम जाखड़, रामेश्वर डोटासरा, डूंगरराम गोदारा, बीरबल देहदू, राकेश सारण, धर्मपाल बांगरवा, रेखाराम लुखा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे।
भोजन व्यवस्था में बुधमल शायच, कानाराम चाहर, हनुमान जाखड़, शंकर शायच, भरत शायच सहित ट्रस्ट के सदस्यों ने सेवाएं दीं।
























